शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

Vijay Kaushal Ji Maharaj | Shree Ram Katha Ujjain Day 10 Part 1

एक संत का दर्शन करते हैं 'राम कथा' से पहले :संत रैदास  

परम गति के लिए गर्भ नहीं कर्म और स्वभाव महत्वपूर्ण होता है ,रैदास जी का जीवन इसे रूपायित करता है।
चमड़े का काम करने वाले इस संत का जन्म काशी में हुआ था । सात जन्मों से ब्राह्मण परिवार में आ रहे थे ,शूद्र जाति  में आ गये -परमगति प्राप्त हुई शूद्र जाति में आने के बाद ।

किस गर्भ में आप आये हैं इसके कोई ख़ास मायने नहीं हैं।परमगति के लिए कर्म आवश्यक है ,आपका स्वभाव क्या यह भी ? 

विदेह कोटि के संत हुए ,परमहंस अवस्था के - रैदास जी। 
गत जन्म की स्मृति थी रैदास जी को। अरे मैं तो ब्राह्मण था शूद्र शरीर में मेरा जन्म हो गया। अब ये बालक अपनी शूद्र माता का दूध न पिए ,स्वामी रामानंद जी  इनकी बस्ती में चलकर आये ,उन्हीं के आशीर्वाद प्रसाद से यह बालक पैदा हुआ था। इनके पिता को कोई संतान तब तक नहीं थी जब तक स्वामी रामानंद जी का प्रसाद इनको किसी और व्यक्ति ने लाकर न दिया था ।रामानंद जी ने देखा यह बच्चा तो वही है -बालक को आशीर्वाद दिया ,बोले बालक दूध पियो तुम्हें बहुत महान कार्य करने हैं। बस बालक दूध पीने लगा।गुरु का आदेश जो था। रामानंद जी ही इनके गुरु हुए हैं।   
काशी नगरी में हाहाकार मच गया ,एक संत की बस्ती में स्वामी रामानंद  के पहुँचने की खबर से। चर्मकारों की बस्ती थी ये। लेकिन साधु इसकी परवाह नहीं करता। साधु  तो निश्चिन्त होता है ,संसारी परवाह करता है लोगों की बातों की। साधु  नहीं।साधु मनमौजी होता है अपनी मौज़ में भगवान् की भी परवाह नहीं करता है। फक्कड़ी इसे ही कहते हैं। 

बचपन से ही पूर्वजन्म के संस्कारों की वजह से रैदास भक्ति ,पाठ पूजा में ही डूबे रहते थे। बाप ने सोचा इनकी शादी कर दो ढर्रे पे आ जाएगा करता धरता कुछ है नहीं।  अब पत्नी भी ऐसी ही पूजा पाठ में मग्न रहने वाली निकली। समस्या पहले से दोगुनी हो गई। ऐसे घर का खर्चा पानी मुश्किल से ही चलता। लेकिन साधु-सेवा ये अपना तन काटकर भी करते।   

एक दिन भगवान् साधारण साधु का वेश धर के इनकी छप्पर नुमा दूकान पर आ पहुंचे -सुना है तुम साधु सेवा में ही ज्यादा रहते हो  पूजा पाठ में तो बड़े पक्के हो लेकिन गृहस्थी की गाड़ी चलाये रखने के लिए तुम्हारी   आमदनी बहुत कम है ,ऐसा करो मेरे पास ये पारस मणि है ये लोहे को स्वर्ण में बदल देती है इसे तुम रख लो। भगवान ने जिस रापी (राँपी ) से   ये चमड़ा काटते थे उस को पारसमणि से छुआ कर उसे  स्वर्ण में भी बदल के दिखलाया।

रैदास बोले मेरे ये किस काम की है -मैं अपनी महनत से जो दो पैसे कमाता हूँ उसमें ही कटौती करके थोड़ी साधु  सेवा कर लेता हूँ। काम चल रहा है।आप ज्यादा ही ज़िद करते हो तो यही कहीं छप्पर में खौंप दीजिये ज़रूरत पड़ी तो देख लूंगा। 

भगवान् कहने लगे हम ने सुना है तुम्हारी पत्नी कड़ी -पकौड़ी बहुत अच्छी बनातीं हैं भोजन प्रसाद नहीं करवाओगे अपने घर। 

रैदास बोले मेरी जाति चमार है आप साधु  समाज से भी बहिस्कृत हो जाओगे और कुछ पैसे देने लगे।भगवान् ने कहा हम तो अच्युत गोत्री हैं तुम्हारी जाति के ही है वैसे भी-

 जाति न पूछो साधु की पूछ लीजिये ज्ञान ,
मोल करो तलवार का पड़ी रेहन दो म्यान। 

भगवान् भाव देखते हैं वस्तु नहीं।जाति नहीं भक्ति देखते हैं भक्त की।  भगवान्  ने ज़िद की तो ये साधु को घर ले आये और भोजन प्रसाद करवाया भोग निकालने के बाद। अब रैदास तो संत थे इनका रोम -रोम आज पुलक से भर गया ये नाचने लगे भगवान् का सानिद्य पाकर।     
आखिर साधु  वेश में थे तो क्या थे तो भगवान् ही -हम तो लाइन में लगते हैं और तिरुपति जैसी भीड़भाड़ वाली जगह में जब लम्बी प्रतीक्षा के बाद नंबर  आता है एक झलक पाकर ही वैंकटेश्वर भगवान की निहाल हो जाते हैं ये तो साक्षात भगवान् ही थे मंदिर में तो प्रतिमा ही निहाल करती है। 

चाह गई चिंता मिटी मनवा बे -परवाह ,

जाकु कछु न चाहिए सोहि शहंशाह।

आज मेरे घर आया रामजी का प्यारा ,

करहुं दंडवत चरण पखारूं  ,

तन मन धन संतन पे वारूँ  . 

आँगन भवन भयो अति पावन ,

हरिजन बैठे हरी जस गावन ,

कह रहे रैदास ,मिले -हरिदासा ,

जनम  जनम  की पूरी आशा। 

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ......

एक वर्ष बाद भगवान् फिर लौटे बोले वो हमारी वस्तु तुम्हारे पास है उसका कोई उपयोग किया या नहीं -रैदास बोले हम को तो पता नहीं आप देख लो कहाँ रखी थी आपने।वहीँ रखी होगी।

भगवान् भी बड़े कौतुकी हैं लीला रची पारसमणि तो उठा ली रोज़ाना ठाकुरजी के नीचे पांच स्वर्ण मोहरे रख देते। 

रैदास वह मोहरे चिमटी से उठाते और गंगा में बहा देते। भगवान् ने दर्शन दिया -कहा रैदास अपनी ज़िद पर मत अड़ो ,सत्संग भवन और आश्रम बनाओ इन पैसो का। भगवान् की इच्छा सरआंखों पर। 

शानदार सतसंग भवन और आश्रम रैदास ने बनवाया भारी भीड़ उमड़ने लगी काशी के संतों पुजारियों को लगने लगा इसने तो हमारी दूकान ही बंद  करवा दी। 

संतों ने काशी नरेश को अपने हक़ में कर लिया। कहा ये जात का चमार कुछ टोना टोटका करता है मन्त्र -वंत्र इसे कुछ नहीं आते ,बुलाकर देख लो। लोगों को बहकाता है यह। 

काशी  नरेश ने ब्राह्मणों से कहा आप अपने ठाकुरजी लाइए ,रैदास को कहा आप भी अपने  ठाकुरजी लाइए -पद गाइये भगवान् को अपने पास  बुलाइये। 

ब्राह्मणों ने पद पे पद गाये भगवान् चलकर नहीं आये ,अपनी जगह से हिले भी नहीं। 

अब रैदास की बारी थी -

रैदास ने छोटा सा पद गाया -

हे हरि आवहु वेगि हमारे ,

पत राखो रैदास  पतित की ,

दशरथ राज दुलारे ,

हे हरी आवहु बेगि हमारे .....   

भगवान् छम छम करते हुए रैदास की गोद  में आ गए। ब्राह्मण अब भी नहीं माने बोले ये जादू टोना करता है। काशी नरेश ने माथा टेक  दिया इस चर्मकार के चरणों में। 

'विश्वनाथ प्रमाणित करें तब मानेंगे ये भगवान् तो इनके अपने हैं।'पंडित अभी भी अड़े रहे - काशी नरेश ने विश्वनाथ जी को माला पहना दीं ।

ब्राह्मणों ने पद गाए माला हिली नहीं रैदास ने गाया माला उड़कर उनके गले में आ गई।

काशी नरेश को शंकर जी का अवतार माना जाता है अक्सर आप रैदास के  पास आ जाते थे पद सुनने।एक बार रैदास जी ध्यान में बैठे थे -आँखें खोलीं  तो सामने काशी नरेश खड़े  थे। रैदास जी ने वही पानी इन्हें दिया जिससे चमड़ा धोते थे।नरेश ने पीने  का नाटक किया सोचते हुए चमड़े धोने वाला पानी ही दे दिया। पानी उनकी कोट की आस्तीन में चला गया। वहां निशाँ पड़  गए।

धोभी ने धोकर दाग छुड़ाने की लाख कोशिश  की और भाव समाधि में चले गए और यह घटना नरेश को बतलाई।   

जब प्यासे थे ,तब पीया नहीं ,

जिन पीया , पिया को जान लिया। 

भोला जोगी फिरै दीवाना,

 वो पानी मुल्तान गया। 

नरेश को अपनी गलती महसूस हुई और दोबारा पहुंचे ,वही चरणामृत  पीने को माँगा -बोले रैदास अब ये मात्र पानी है चरणामृत नहीं है ,इसे पीने का कोई फायदा नहीं  . 

ऐसा ही किस्सा गोरखनाथ जी के साथ जुड़ा हुआ है। 

एक बार ये काशी में रैदास जी के पास उनकी छप्परनुमा दूकान पर आये इन्हें उस समय बहुत ज़ोर से प्यास लगी थी इन्होनें रैदास से पानी माँगा -रैदास ने इन्हें अपने उसी पात्र में से पानी दे दिया जिसका इस्तेमाल ये अपने चमड़े को धोने के लिए करते थे। गोरखनाथ जी ने पानी अपने खप्पर में रख लिया और मन में सोचते हुए आगे बढ़ गए ,ये चर्म को धोने में प्रयुक्त होने वाला पानी मैं पीऊंगा ?

कबीर के घर पहंच गए काशी में -कमाली उन दिनों छोटी सी थी उसने कौतुक में इनका खप्पर उठाया और वह जल पी गई। कमाली बड़ी हुई उसकी शादी हो गई और वह शादी के बाद मुल्तान आ गईं उस समय पाकिस्तान का अस्तित्व नहीं था भारत अखंड था। 
कालान्तर में एक बार गुरु गोरखनाथ का मुल्तान आना हुआ। ये अपनी सिद्धियों के लिए जाने जाते थे। भारी सैलाब उमड़ा ,नगर का हर सभ्रांत  व्यक्ति चाहता था गोरखनाथ जी  भोजन प्रसाद उनके ही घर ग्रहण करें। 

गोरखनाथ ने इसके लिए एक शर्त रखी- जो कोई मेरे खप्पर को भर देगा मैं उसी के यहां भोजन प्रसाद ग्रहण करूंगा। कोई भी ऐसा न कर पा रहा था खबर कमाली तक भी पहुंची उसने अपने पति से कहा आप भी उन्हें बुलाओ मैं भी खप्पर सेवा करूंगी। पति बोला बावली हम जाति के भी जुलाहे हैं हम कैसे उस खप्पर को भर सकते हैं जिसे शहर के नाम- चीन लोग भी न भर पाए। 

उसने ज़िद की पति ने बुलवा लिया कमाली को सेवा का मौक़ा देने के लिए गोरखनाथ जी को आग्रह करके। गोरखनाथ आये -कमाली ने उनके खप्पर में एक चम्मच चावल डाला ,खप्पर भर गया। 
चमत्कृत गोरखनाथ बोले कमाली तुमने ये कमाल कहाँ से सीखा -बोली कमाली मैं ने कहीं से नहीं सीखा ये सब आपके खप्पर का ही कमाल है जब मैं छोटी थी आप हमारे घर काशी पधारे थे मैं खेल -खेल में इस खप्पर का सारा जल पी गई थी जिसे आप न पी पाए थे किसी संकोच -वश। 

अविलम्ब गोरख सीधे योगमार्ग से काशी आ पहुंचे रैदास के पास और उस पात्र को उठकर मुंह से ही जल ग्रहण करने लगे। रैदास हंसकर बोले यह अब सिर्फ चर्म धोने में प्रयुक्त पानी है कोई चरणामृत नहीं है। 

'मनचंगा तो कठौती  में गंगा ' मुहावरे का अपना प्रसंग है।
एक लालची पंडित थे गंगा स्नान को जा रहे थे पूछा रैदास से आप भी चलिए। वह कहने लगे भैया मेरे ये दो केले गंगा मैया को चढ़ा देना मैं तो न जा सकूंगा। 

पंडित जी ने ऐसा किया ज़रूर लेकिन गंगा मैया ने दोनों हाथ बाहर निकालकर जो एक हीरों का कंगन समेत आकाशवाणी के दिया पर वह वाणी सिर्फ पंडित जी ही  सुन सकते थे अन्य नहीं। कहा गया था ये कंगन मेरे रैदास को दे देना। पंडित जी लालच से भर गए इतना बेश -कीमती कंगन उन्होंने इससे पहले देखा ही कहाँ था। उन्होंने ये कंगन अपनी पंडाइन को दे दिया उसने कहा कहाँ इतना कीमती कंगन पहनूंगी लोगों ने मुझे पहने देखा तो कहेंगे इसने कहीं से चुराया है इस गरीब पंडाइन के पास यह कैसे आया ?उसके कहने पर उसने वह कंगन एक सुनार को बेच दिया। 

सुनार को पता था इतना कीमती कंगन खरीदने वाला काशी में कोई ग्राहक नहीं है उसने वह कंगन काशी नरेश को और नरेश ने वह अपनी पत्नी रानी साहिबा को दे दिया।कंगन उन्हें इतना पसंद आया वह दूसरे हाथ के लिए भी वैसा ही कंगन मांगने लगीं। राजा जेवर वाले सुनार के पास पहुंचा उनसे पता चला एक पंडित जी इसे बेच गए थे। पंडित जी ने नरेश को दंड के भय से सच -सच सब कुछ बता दिया। 

नरेश काशी रैदास के पास पहुंचे और उनसे कहा ऐसा एक कंगन और चाहिए -रैदास बोले पहले हाथ तो दिखाओ जिसमें ये कंगन आएगा। यानी कंगन भी चाहिए और अपना बड़प्पन भी बरकरार रखना है। रानी ने आखिरकार झुककर अपना हाथ दिखाया -रैदास ने कठौती में हाथ डाला  प्रार्थना की माँ गंगा से मैया मुझे इसके साथ का दूसरा कंगन दे दो ,ये तुम्हारे भक्त की लाज  का सवाल है। कठौती  में से हाथ बाहर निकाला तो उसमें कंगन था। 

तभी से ये मुहावरा चल निकला -

'मन चंगा तो कठौती  में गंगा ' -माँ गंगा अपने बेटे को कठौती में आकर कंगन दे गईं। 

संत संग तिन पातक टरहीं  -

मेरा तार हरी संग जोड़े,

 ऐसा कोई संत मिले , 

बस जीवन में यही आस होनी चाहिए। 

बाबा तुलसी कह गए हैं -

एक घड़ी आधी घड़ी ,आधी की पुनि आध ,

तुलसी संगत साधु की काटे कोटि अपराध।  

   सन्दर्भ -सामिग्री :

(१ )

Vijay Kaushal Ji Maharaj | Shree Ram Katha Ujjain Day 10 Part 1 2016 mangalmaypariwar.com


https://www.youtube.com/watch?v=n905zhrwnq8

गुरुवार, 16 नवंबर 2017

Vijya Shankar Kaushal JI Ram Katha Day 9 Part 3 Ujjain


गुरुवार, 16 नवंबर 2017


Vijya Shankar Kaushal JI Ram Katha Day 9 Part 3 Ujjain

भक्त कभी भगवान् को नहीं खोजा करता भगवान् ही खोजते हैं चाहे भक्त हिमालय की किसी गुफा में छिपा हो। 

भगवान् पुकारे जाते हैं भक्त पुकारा करते हैं डबडबाती आँखों से रूंधे गले से। 

गज ने पुकारो मैंने गरुण बचायो  ,

मैंने  गाह को पछाड़ो ,सुन प्रेम की पुकार। 

द्रौपदी पुकारी मोहे ,सुध लीजै बनवारी ,

मोहि आस है तिहारी ,कहुँ  जाऊँ का के द्वार 

करि देर नहीं  मैंने , तुरत ही चीर बढ़ायो। 

नाना भांत नचायो भक्तन ने मोहे ,

 तजि लाज ही नहीं मैंने ,

बैकुंठ ही बिसरायो मैंने ,

बहुत ही नांच नचायो 

भक्तन मोहे  बहुत ही नचायो। 

जागते रहिए बस  भगवान् आता है ,आएगा सबके द्वार पर आता है  लेकिन हम सोते मिलते हैं भगवान् बड़ा दयालु है जगाता नहीं है ,सो रहा है मेरा बालक ,जो जाग रहा है  उसके द्वार पर प्रभु कान लगाकर खड़े हो जाते हैं। -पूजा पाठ आदि जो भी हम करते हैं यह जागना ही है। 

जो जाग रहा है उसे भगवान् मिलता है -

जो सोवत है सो खोवत है ,

जो जागत है सो पावत है। 

भगवान ने बैकुंठ से संकेत कर दिया भविष्य वाणी कर दी -हे ऋषि डरो मत, हे !धेनु !डरो मत। मैं आ रहा हूँ। शंकर जी की बात सब देवताओं की समझ में आ गई सब वहीं खड़े होकर पुकारने लगे थे -हे भक्त वत्सल रक्षा करो,रक्षा करो ,रक्षा करो। भविष्य वाणी हुई :

"धैर्य रखो अंशों के समेत मैं  अवध में अवतार लेने आ रहा हूँ।"

सब किष्किंधा में पहुँच गए भगवान की प्रतीक्षा करने लगे। भगवान् बालक बनकर प्रकट होने वाले हैं अवधपुरी में । 

अवधपुरी  रघुकुल मन राउ ,वेद विहित तेहि दशरथ नाहु 

धर्म धुरंधर गुण निधि ग्यानी ,...... सारंग पानी। 

श्री अवध (पुरी)  जहां कभी किसी का वध नहीं हुआ ,वहां भगवान्  प्रकट होते हैं।अयोध्या -जहां कोई युद्ध नहीं -शांत हृदय ,हृदय को अयोध्या बनाइये भगवान् का हृदय में प्राकट्य होगा। हृदय ही तो अयोध्या है ,जिसमें श्रीराम का निवास है। 

"दादी माँ !मेरे पिताजी की तो पुरोहिताई चल गई ,मैं किस की पुरोहिताई करूंगा ?बालक रो रहा है अरुंधति जी (गुरु माता )की गोद  में ,दशरथ जी आग्रह करके पूछ रहें हैं -गुरु माता के पैर पकड़ लिए हैं दशरथ जी ने कहते हुए यह कोई साधारण बालक नहीं है रो रहा है तो ज़रूर कोई बात होगी आप मुझे बताइये। गुरु माता दशरथ जी की उत्सुकता बढ़ाते हुए कहतीं हैं -आपके सुन ने लायक बात नहीं है कह तो रहा है ज़रूर कुछ ?"

दशरथ जी कहते हैं ऐसी क्या बात है ?कहिये आप ज़रूर कहिये निस्संकोच कहिये हम सुनेंगे -गुरु माता कहतीं हैं बालक कह रहा है -दादी मेरे पिता को तो पुरोहिताई मिल गई मैं किसकी पुरोहिताई करूंगा ?"

कहते हैं एक बार अरुंधति जी राजमहल में बैठी  वशिष्ठ जी से पूछ रहीं थीं क्या 'श्री लाल जी' का राजमहल में जन्म नहीं होगा। बोले वशिष्ठ जी हो तो जाए पर राजा में 'श्री लाल जी' की  लालसा ही नहीं हैं। 

अरुंधति जी बोलीं लालसा हम पैदा कर देंगें। वशिष्ठ जी ने कहा ठीक है एक काम आप कर दो -लाल जी को हम पैदा करवा देंगे। भले ये प्रसंग मानस  में नहीं है विजय कौशलजी कहते हैं हम को भी मालूम नहीं हैं लेकिन कुछ संत कहते हैं इसलिए हम भी बता रहे हैं। संकोच हमें भी हो रहा है। 

दशरथ जी मुख से तो एक शब्द नहीं बोले लेकिन जैसे किसी ने छाती पे हथोड़े से चोट मार दी हो। गुरु माता तो चली गईं। दशरथ जी को बड़ी आत्म ग्लानि होती है अपने कक्ष में आकर सारी  रात फूट -फूट कर रोते हैं। 

एक बार भू -पति मनमानी 

भई ग्लानि मोरे सुत नाहीं। 
...... ...... ...... 

निजी सुख दुःख सब गुरु ही सुनाये .... 


भगवान् हृदय में बोल गए -गुरु द्वारे जाओ तभी मैं आपके द्वार आऊंगा। 

गुरु गृह गयोहु  तुरत महिपाला ,

चरण लागि करि विनय बिचारा।

जो रो लिया वो भक्त हो गया। दशरथ जी महाग्यानी थे दशरथ जी को चुप कराते -कराते वशिष्ठ जी भी  रो दिए। 

"धरौ धीर "-राजन धीर धरो ,एक नहीं कई कई बच्चे आएंगे भले रानियां रजोनिवृत्त हो चुकी हैं।ये  बच्चे क्रिया से नहीं कृपा से आएंगे। 

श्रृंगी ऋषि वशिष्ठ बुलावा ,


पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया
 -और जैसे ही पूर्ण आहुति दी है यज्ञ नारायण स्वयं प्रकट हो गए -लो राजन प्रसाद लो सबको वितरण कर दो -जैसे ही तीनों माताओं ने प्रसाद का सेवन किया तीनो गर्भवती हो गईं।  

जिस दिन से भगवान् अयोघ्या में प्रकट हुए हैं :

सकल लोक सुख सम्पत छाये 

-सम्पूर्ण  लोक के साधन अयोध्या में आ गए। रिद्धि सिद्धियों की अयोध्या में बाढ़ आ गई। माताएं व्रत उपवास करने लगीं। 

सृष्टि का नियम  टूट गया ,जब सृष्टा ने ही नियम छोड़ दिया ,मनुष्य शरीर धार प्रकट हुए हैं -अब अयोध्या में भी महात्माओं का कुम्भ लगने लगा। माताओं में से उनके शरीर में से गर्भ के चित्र दिखाई देने लगे।

दिव्य ललाट जटाओं वाले  साधू महात्मा अवध में दिखायी  देने लगे। घर की दरो - दीवारों पर महापुरुषों के चित्र दिखाई देने लगे। सुंदर चित्र का गर्भवती माता के गर्भस्थ पर प्रभाव पड़ता है। आकाश में देवताओं के विमान मंडराने लगे। पूरे राजभवन की दीवालों में महापुरुषों के चित्र लगाए गए हैं। 
अपने घर का चरित सुधारना है, महापुरुषों के चित्र लगाइये घर की दीवारों पर सन्देश यही है। 


हरी प्रतीक्षित हैं -

हरी आ जाओ, हरी आ जाओ ,हरी आ जाओ 

पूरी रात अयोध्या पुकारती हैं पुकारने से ही भगवान् आते हैं 

राम जनम सुख मोल ... 

नौमी तिथि मधुमास पुनीता ,रामा  हो रामा ,

शुकल पक्ष अभिजीत हरिप्रीता ,रामा हो रामा 

मध्य दिवस अति शीत  न घामा ,हो रामा हो रामा ...... 

योग लग्न , ग्रह,  वार ,तिथि सब अनुकूल है  ,भगवान् का प्राकट्य होता है  

दोपहर बारह बजे का समय अभिजीत नक्षत्र -भगवान् का जन्म हो गया है 

दिन के बारह बजे का महत्व :

इस समय भूख लगती है प्राणी को -भूखा व्यक्ति क्रोध करता है ,जब जगत के भोगों की पीड़ा तुझे सताये,क्षुधा सताये  उस समय मेरा आगमन होगा।अगर तू राम -राम का कीर्तन करेगा तो तुझे विश्राम मिलेगा ,आराम मिलेगा -

सकल लोक गायक विश्रामा -जो भी ये कीर्तन जाएगा आराम पायेगा। 

भगवान् कृष्ण का प्राकट्य रात्रि बारह बजे होता है इसके भी निहितार्थ हैं :

यह रात का वह पहर है जब व्यक्ति को काम-वासना  सताती  है ,सन्देश यह है तब अपने बिस्तर पर उठके बैठ जाइये ,भगवान् को याद कीजिये दो मिनिट ,अवांछित ,अतिरिक्त 'काम' शांत हो जाएगा। 

आज नौमी का प्रात : काल है अयोध्या में भारी भीड़ है। सरयू पर साधू सन्यासियों की भीड़ है। कस्तूरी की चारो और सुगंध है। 'बारह का घंटा' बजते ही चतुर्भुज नारायण प्रस्तुत हो गए।

"आप तो दादा बनके आये हैं  जैसे नवजात शीशु  आता है मैं चार हाथ कहाँ से लाऊँ ?वैसे आइये नैमिष आरण्य में आपने वायदा किया था। आप शिशु बनिए -दुनिया के लिए रोइये जब आपका रोना शुरू होगा तब अयोध्या वासियों का रोना  बंद होगा -रोना शगुन है शुभ माना जाता है प्रतीक है इत्तला है शिशु के आने की आसपास को ।"-बोलीं हैं अनुनय विनय संग माता कौशल्या भगवान् से।  

कौशल्या माँ की गोद  में सांवले सलोने कुंवर (भगवान् )आये हैं  -दशरथ जी सुनकर नाचने लगे -सुमंत जल्दी बाजे बजवाओ। लड़के के होने पर तभी से बाजे बजते हैं.

 और बेटी के पैदा होने पर आज हिन्दुस्तान में नानी मर जाती है घरवालों की ,सबके मुंह लटक जाते हैं।बाजे तो वह भी बजवाती है विदा के समय।अपना भाग्य तो साथ लाती ही है - 

पिता के लिए सौ -भाग्य (सौभाग्य) लेकर आती है बिटिया इसीलिए उसके नाम के आगे लिखा जाता है सौभाग्यवती ,जिस घर में बिटिया  का जन्म नहीं होता उसमें भूत लौटते हैं। फिर भी बिटिया के जन्म पर बस दो बार पड़ोसियों को सूचना देने के लिए तवा बजाया जाता है फिर पूरे घर को सांप सूंघ जाता है दादी और बुआ के तो जैसे प्राण ही सूख जाते हैं। 

थोड़ी ही देर में कैकई भी अपने पुत्र भरत को और सुमित्रा अपने दोनों नवजातों लक्ष्मण शत्रुघ्न को गोद  में लिए आ जातीं हैं पूरा अवध ख़ुशी से  नाचने लगता है।कौशल्या जी की तो समाधि ही लग जाती है। 

अवधपुर बाजे बधैया ,जन्म लियो चारों भैया 

राजा दशरथ लाला  जायो ,नाम धरे रघुरैया  ,

अवधपुर बाजे बधैया ,जन्मलियो है चारों भैया 

राम लला  की होत  निछावर ,दही , माखन घृत दहिया ,

अवधपुर बाजे बधैया .....

बधाई हो ,बधाई हो ,....मिठाई हो मिठाई हो  

जय श्री राम ,जय श्री राम। .

तीनों भाइयाँ की जय हों, तीनों ही माताअन  की जय हो।

सन्दर्भ -सामिग्री :https://www.youtube.com/watch?v=Wpd38pP_nP4

Vijay Kaushal Ji Maharaj | Shree Ram Katha Ujjain Day 9 Part 3 2016 mangalmaypariwar.com

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(१ )Did you mean: 

Vijay Shankar Kaushal JI Ram Katha Day 9 Part 3 Ujjain




Watch Special Live Telecast of Shree Ram Katha by Vijay Kaushal Ji Maharaj from Ujjain Day 9 Part 32016 ...

  







   



सन्दर्भ -सामिग्री :

(१ )Vijya Shankar Kaushal JI Ram Katha Day 9 Part 3 Ujjain 

( २ )

Published on Nov 23, 2016


Watch Special Live Telecast of Shree Ram Katha by Vijay Kaushal Ji Maharaj from Ujjain Day 9 Part 3 2016 mangalmaypariwar.com

Vijay Kaushal Ji Maharaj | Shree Ram Katha Ujjain Day 8 Part 2

नारद शाप दीन्हि एक बारा
कल्प एक तेहि लेइ अवतारा ,
गिरिजा चकित भइँ ,
नारद विष्णु भगत मुनि ग्यानी,
कारण कवन शाप मुनि दीन्हा ,
का अपराध रमापति कीन्हां।   


नारद विष्णु भक्त है इतने बड़े ग्यानी हैं भगवान् को जो उनके गुरु भी है शाप कैसे दे सकते हैं ?मुझे बाताओ। किस कारण से मेरे गुरु नारद को क्रोध आया जिसने उन्हें शाप देने पर विवश किया। गुरु की महिमा होती है. गुरुता जिसमें है जो सर्वांग निर्दोष होता है वही गुरु होता है। 

राखै  गुरु जो कोप विधाता 
गुरु विरोध नहीं को जग त्राता। 
विधाता के कोप से भी यदि कोई बचा सकता है 
गुरु  राम दास के जीवन की बड़ी प्रख्यात घटना यही है इनके सामर्थ्य की जिसने इन्हें 'समर्थ' की उपाधि दिलवाई है काशी में ही।
पंडित गंगा भट्ट जी वही हैं जो शिवाजी महाराज का राज्य अभिषेक करने काशी से चलके गए थे। इनके पास स्वामी रामदास जी ने अपने शिष्य  को भिक्षा लेने के लिए पंडित गंगा भट्ट जी के पास ही भेजा था।पंडित जी ने शिष्य के मस्तक पर मृत्यु की रेखाएं देखकर कहा -तुम्हारी कल सायं चार बजे मृत्यु हो जाएगी। 
मौत ठीक चार बजे आई लेकिन उस वक्त शिष्य गुरु राम दास के चरण दबा रहा था। यम के दूत शाम सात बजे तक प्रतीक्षा करके लौट गए जाते जाते गुरु राम दास को प्रणाम कर गए।गुरु की सेवा में रत शिष्य को मौत भी नहीं ले जा सकती सेवा के उन क्षणों में। 

अगले दिन फिर पंडित जी के पास शिष्य को स्वामीजी ने भेजा। शिष्य को देखा और विस्मय से पूछा तुम जीवित कैसे हो ?शिष्य बोले काल तो आया था ठीक चार बजे ही लेकिन मेरे गुरु को प्रणाम करके लौट गया। पंडित गंगा भट्ट ने उस दिशा में प्रणाम किया जहां स्वामी रामदास रुके हुए थे और घोषणा की आज से इन्हें समर्थ गुरु रामदास के नाम से जाना जाएगा। 

मदन गोपाल शरण तेरी आयो ,

श्री गुरु देव शरण तेरी आयो। 

श्री भट्ट के प्रभु दियो अमर  पद 

यम डरप्यो जब दास कहायो।
पार्वती जी खड़ी हो गईं -भूल की होगी तो परमात्मा ने ही की होगी। 

"मुनि मन मोह आचरज आई " 
नारद जी को शाप था दक्ष प्रजापति के चौबीस मिनिट से ज्यादा ये कहीं टिक नहीं सकते। लेकिन एक बार ये टहलते हुए हिमालय पर आये और यहां के तप युक्त माहौल में नारद की बैठते ही समाधि लग गई। 
इंद्र घबरा उठे -कामदेव को अपने पूरे असलाह के साथ बुलाया आदेश किया -नारद का तप भंग करना है शीघ्र जाओ। 

नाचने वाले थक गए ,वाद्य यंत्र टूट गए नारद के हृदय में राम हैं बाहर का कामुक वातावरण उन्हें प्रभावित नहीं कर पाता वह तो देह से परे समाधिस्थ हैं। 
तंग आकार कामदेव ब्रह्मास्त्र छोड़ देते हैं सारा वातावरण सुगन्धि से भर जाता है कामुक हो उठता है। नारद के संयम का यशोगान गाते हैं कामदेव और उनकी अप्सराएं -अब  प्रशंशा और दुर्गुण नारद के अंदर प्रवेश करते हैं ,अहंकार जागता है। नारद मैं मैं मैं करने लगते हैं। मैंने काम को जीत लिया ,मैंने क्रोध को जीत लिया। 
भक्त अहंता भाव से करता भाव से मुक्त होता है वह करता भाव से परे निकल के गाता है :

मेरे  आपकी कृपा से सब काम हो रहा है ,

करते हो तुम कन्हैयाँ मेरा नाम हो रहा है।

सबसे ज्यादा ईर्ष्या नारद को शंकर जी से हो गई ,शंकर ने तो काम ही को जीता मैंने तो क्रोध को भी जीत लिया। मैं शंकर जी से बड़ा हो गया जाकर उन्हें बताता हूँ। 

अरे वो काम देव है न वह अपनी अप्सराओं को लेकर आया ,उन्होंने सारे अंग फड़का दिए ,देहमुद्राएँ दिखलाएँ मैं समाधिस्थ रहा। कामदेव हताशा लिए लौट गए। 
शिव की आँखों से दुःख के आंसू गिरते हैं। नारद जी ने शंकर जी से पूछा जो कथा मैंने आपको अपनी बीती सुनाई वह आपको कैसी लगी ?
शंकर जी ने हाथ जोड़ दिए -
मुनिवर मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ इस कथा को आप भगवान् विष्णु को भूलकर भी न सुनाना भले वह खुद इसे सुनाने का आग्रह आपसे करें। 
नारद को ऑब्सेशन होता है भगवान विष्णु के पास उड़के पहुँच जाऊं ,अपने ही गुणगान गाऊं ,अपने ही मुख  से ,अब मैं उनके बराबर हो गया। 
बस वीणा बजाते बजाते इसी भाव मुद्रा में नारद क्षीर सागर आ गए। आज उनके शुद्ध हृदय में अहंकार की कंकड़ी आ गई है भगवान् कहीं दिखाई नहीं दिए -
हारकर भगवान् को नारद पुकारने लगे -

सूर्य नारायण नारायण नारायण ,

चंद्र नारायण नारायण नारायण ,

श्री मन नारायण नारायण नारायण।

भगवान् हड़बड़ा कर बैठ गए -बोले लक्ष्मी जी मेरा नारद आया है आज वह बहुत बीमार है काम पीड़ित है ,अंधा हो गया है काम से आज वह खुद नहीं पहुँच पायेगा। आज वह भक्त नहीं है अहंकारी है। 
नारद यह सोचते हुए के आज तो मैं इनके बराबर का हो गया हूँ।उन्हें भगवान् का सिरहाना दिखाई देता है वहीँ बैठ जाते हैं जो मन में होता है वही बाहर दिखाई देता है। नारद जी बैठ गए। भगवान् जानते हैं आज नारद खुशामद सुनना ही पसंद करेगा। 
बोले विहँसी चराचर राया ,
काम चरित नारद सब भाखे ....
अति प्रचंड रघुबर के माया ...... .
हे मुनिवर बहुत दिनों में कृपा की इस बार। नारद भगवान के पास बैठे हैं राम की बगल में बैठे हैं और काम दर्शन कर रहे हैं भजन में मन का बड़ा महत्व होता है परिणाम मन का हुआ करता है। मन ही तन को वहां ले जाता है जिस जगह का  मन चिंतन कर रहा होता है। इसलिए मन की मत सुनिए। मन को रोकिये। किस पर ध्यान देना है निर्णय लो -राम पे या काम पे। तन वहीँ जाएगा। 
क्या जीवन इन मुर्दो को रिझाने के लिए हैं नृत्यांगना नाचती जाती है रोती  हुई मन में उसके राम हैं। 

वैश्या के घर के सामने वाले मंदिर में पंडित जी आरती मुख से गाते हैं -मातु पिता तुम मेरे और कनखियों से वैश्या नर्तकी को निहारते रहते हैं। 

दोनों की मृत्यु होती है चित्रगुप्त अपना निर्णय सुनाते हैं वैश्या को स्वर्ग और पंडित जी को नर्क में भेज दिया जाता है। 
अब भगवान् लीला करते हैं जब नारद चलते हैं भगवान् रास्ते में एक नगर बसा देते हैं जहां बड़े बड़े महल हैं  बड़े बड़े पंडाल हैं इस शीलनगर में।राजा की बिटिया विश्वमोहिनी का स्वयंवर हैं वहां नारद पहुँचते राजा कहते हैं नारद से जरा इसका हाथ देखो -नारद कहते हैं जो इससे शादी करेगा वह तिरलोकी हो जाएगा अंदर तो नारद के काम घुसा हुआ था इसलिए कहना चाहते तो थे इसकी शादी तिरलोकी से होगी कह गए ठीक इसका उलटा।
बस नारद जी झटपट वहां से चक देते हैं सोचते हुए इस शीलवती रूपमोहिनी  कन्या की शादी तो मुझसे ही होनी चाहिए।शहर के बाहर निकले गाँव वासियों ने पैर लिए नारद के गुरूजी एक भजन सुना दीजिये आग्रह किया। नारद के नादर तो काम घुसा हुआ था। कहते हैं मुझसे भजन वजन कुछ नहीं होगा तुम ला सकते हो तो उस कन्या को लादो। 

आपण रूप देयो मोहि -
कहते हुए नारद भगवान को याद करते हुए। भगवान्  तो लीला पुरुष हैं मर्कट (बंदर )का रूप दे देते हैं नारद को लेकिन नारद जब अपना चहेरा देखते हैं तो उन्हें विष्णु दिखाई देते हैं जब दूसरे नारद को देखते हैं तो वह मर्कट नज़र आते हैं। 
शिव के गणों ने जो नारद के दोनों आकर बैठ गए थे -कहा बाबा ब्याह करबे को आये हो पहले अपना रूप तो शीशे में देखो।
नारद जी गुस्से में कंपकपाते हुए जा रहे हैं पीछे से भगवान् का रथ आता है- नारद गाली देते हैं भगवान को शाप देते हैं -

नारी विरह तुम होय  दुखारी। 

नारद का प्रसाद (शाप )भगवान ने सर पर रख लिया।भगवान् भी अपने सर पर संतों का हाथ रखते हैं। 

हम को भी अपने सिर पर किसी न किसी  का हाथ रखना चाहिए। 

सन्देश यह है अहम ,काम ,क्रोध करने के लिए हम दुनिया की तरफ भागते हैं नारद भगवान् की  ओर  भागे हैं। शुभ भी तेरा अशुभ भी तेरा। सब कुछ तुझको अर्पित। 

भगवान  कहते हैं तुम सब कुछ अर्पण तो करो अच्छा भी बुरा भी मैं हर हाल में तुम्हारी रक्षा करूंगा।जो सब प्रकार से भगवान् को समर्पित हो जाते हैं भगवान् उनके लिए महतारी बन जाते हैं महतर की तरह उनका सारा मल साफ़ कर देते हैं जैसे गाय अपने नवजात बच्चे को चाटकर साफ़ कर देती है जीभ से चाटकर।जीव की गंदगी को चाटकर चमकाना भगवान  की गारंटी है वह भगवान् की शरण में तो आये। 

करहुँ सदा तिनकी रखवारी ,
ज्यों बालक राखै महतारी। 

महतारी शब्द महतर से बना है।     
   


     
    
सन्दर्भ -सामिग्री :

(१ )

Vijay Kaushal Ji Maharaj | Shree Ram Katha Ujjain Day 8 Part 2


(२ )https://www.youtube.com/watch?v=Ha1ltdnWKKw

Vijay Kaushal Ji Maharaj | Shree Ram Katha Ujjain Day 8 Part 3

जो भगवान् को समर्पित हो जाते हैं भगवान् कैसे उनकी चिंता करते हैं -महाभारत का एक प्रसंग देखिये -

चंद्र टरै सूरज टरै ,टरै विश्व ब्योहार -भीष्म की प्रतिज्ञा झूठी नहीं हो सकती -कल का सूरज तब अस्त होगा जब रणांगण में अर्जुन की लाश गिर जाएगी। पांडवों  में शोक छा गया। 
सबसे ज्यादा चिंता द्वारकानाथ को हुई कल क्या होगा। अर्जुन को मरवाया नहीं जा सकता। अर्जुन मर गया तो महाभारत का युद्ध ही समाप्त हो जाएगा। पांडवों  के पास फिर बचेगा ही क्या ?

भगवान् व्याकुल हो उठते हैं अर्जुन के कैम्प में आते हैं -देखा अर्जुन खर्राटे लेकर सो रहा है भगवान पूछते हैं कल तेरी मौत होने वाली है ,भीष्म प्रतिज्ञा कभी झूठी नहीं होती , इतना जानकर भी तू निश्चिन्त होकर सो कैसे रहा है ? तुझे नींद कैसे आ रही है। ?

मुझे ये मालूम है लेकिन जिसकी चिंता में भगवान् खुद बे -चैन होकर जाग रहे हैं उसकी चिंता मैं क्यों करूँ ? 

सोवै सुख तुलसी ,भरोसे सीताराम 

काहू के बल भजन है ,और काहू के आचार ,

व्यास भरोसे कुंवर के भैया सोवत  पाँव पसार  . 

मुनि आराम से सोता है जिसका व्यापार है वह जागता है चिंता करता है मैं क्यों चिंता करूँ। भगवान् जिसके भरोसे रहता है उसकी चिंता भगवान् करते हैं। जो भगवान् के भरोसे व्यापार करता है उसे घाटा  कभी  होगा भी नहीं।

प्रसंग है आपका जाना पहचाना कौरव पांडवों का युद्ध चल रहा है। अर्जुन के तीर से कौरव सैनिक गाजर मूली की तरह कट रहे हैं ,हाहाकार मचा  हुआ है कौरव पक्ष के सैनिकों में चारों तरफ -उस दिन की युद्ध समाप्ति पर दुर्योधन भीष्मपिता के शिविर में जाकर कहते हैं -आप अपनी पूरी क्षमता से नहीं लड़ रहें हैं ,पांडवों के साथ आप पक्षपात कर रहें हैं। 

भीष्म तभी प्रतिज्ञा लेते हैं कल संध्या के समय मेरे संध्या से उठने से पहले अपनी पत्नी को मेरे पास भेज देना प्रणाम करने ,मैं उसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दे दूंगा। फिर युद्ध में तुम्हें कोई नहीं मार सकेगा। अर्जुन के बाण तुम्हारा कुछ नहीं कर सकेंगे। 

ये खबर किसी तरह पांडवों के शिविर तक भी पहुँचती है तभी कृष्ण द्रौपदी के  कैम्प की और दौड़ते हैं ,कहते हैं चलो वक्त बहुत कम है ,वहां जहां मैं ले चलता हूँ -भीष्मपितामह  के शिविर में। 

द्रौपदी कहतीं हैं हम वहां शत्रु के कैम्प में पहुंचेंगे कैसे ?कृष्ण कहते हैं उसकी चिंता तुम मत करो। बस जैसे ही भीष्म आँख खोले तुम उन्हें पांच बार प्रणाम कर देना।वह इस समय में ध्यान में बैठे हैं। 

द्रौपदी पहली बार प्रणाम करती हैं अभी भीष्म ने आँख नहीं खोली है -वह कहतें हैं सौभाग्यवती भव। द्रौपदी फिर दूसरी बार प्रणाम करती हैं वह पुन : कहते हैं सौभाग्यवती भव,द्रौपदी तीसरी और चौथी बार भी प्रणाम करतीं हैं वह कहते हैं सौभाग्यवती भव,जब द्रौपदी पांचवी बार प्रणाम करती हैं भीष्म का माथा ठनका -यह दुर्योधन की महारानी पत्नी नहीं हो सकती ,उसे तो एक बार प्रणाम करने में भी बड़ा जोर पड़ता है। 

बोले भीष्म अपना परिचय दो -"आपकी कुलवधू द्रौपदी "आँख खोलीं देखा  हाथ जोड़े द्रौपदी को बोले ये मुझसे कैसा अनर्थ हो गया ,बोले जाओ -युद्ध तो अब समाप्त हुआ कल से बस नाटक भर देखना  युद्ध का। 

पूछा तुम यहां तक आईं कैसे ?बोलीं दौपदी कृष्ण लाये। पूछा भीष्म ने कहाँ हैं ?  

"बाहर "-ज़वाब मिला। कृष्ण ने देखा द्रौपदी की चप्पलें बाहर रखी हैं यहीं रह गईं तो इन विशेष चप्पलों से ही पहचानी जाएंगी ,पोल खुल जाएगी। कृष्ण चप्पलें उठाकर बगल में दबा लेते हैं।एक वटवृक्ष की आड़ में छिप जाते हैं। 

भीष्म उन्हें देख साष्टांग दंडवत प्रणाम करते हैं ,कृष्ण आशीर्वाद के लिए बाहें खोलते हैं चप्पलें भीष्म के सर पे गिरतीं हैं। भीष्म पहचान लेते हैं इन चप्पलों को और गदगद हो जाते हैं - ये मेरे भगवान् तो अपने भक्तों की चप्पलें भी उठा लेते हैं कितने स्नेहिल हैं।    

कोई घनश्याम सा नहीं देखा ,

जो भी देखा वो बे -वफ़ा देखा। 

योगियों के ध्यान में जो आता नहीं ,

संग भगतों के नाचते देखा। 

किस तरह द्रोपदी की लाज बची ,

श्याम  साड़ी में ही था ,छुपा देखा। 

मैं भी आया हूँ उसी दर पे ,

जब कोई आसरा नहीं देखा। 

भरोसा करना है तो रघुवीर का करो -भरत कहते हैं। संसार का भरोसा करोगे तो धोखा खाओगे भरोसा भरोसेमंद का करो ,भगवान् का ही करो -भगवान् फिर उनकी ऐसे रक्षा करता है :

करहुं सदा तिनकी रखवारी ,
जेहि बालक राखै  महतारी। 

सन्दर्भ -सामिग्री :

(१ )https://www.youtube.com/watch?v=wUEm7Rgf86I

(२ )

Vijay Kaushal Ji Maharaj | Shree Ram Katha Ujjain Day 8 Part 3 

Vijay Kaushal Ji Maharaj | Shree Ram Katha Ujjain Day 9 Part 2

करहिं आहार शाक फल कंदा ,

सुमरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा। 

आहार का प्रभाव भजन पर पड़ता है। भजन करने वाले को आहार बहुत शुद्ध चाहिए। मनुष्य जैसा आहार करता है वैसा उसका स्वभाव बनता है। 

पत्ती वाली सब्ज़ी (मैथी ,पालक ,शलगम के पत्ते ,बथुआ ,चौलाई आदि )से पेट शुद्ध  होता है।जिस मौसम में जो पत्ते वाली सब्ज़ी (शाक )मिले खाइये। 

 फल से मन शुद्ध होता है मौसम का फल हर मौसम में अनेक प्रकार के फल आते हैं उससे मन शुद्ध होता है। मौसमी फल खाइये ,ज़रूरी नहीं है शेव और अनार ही खाएं। अमरुद एंटीऑक्सीडेंट के मामले में शिखर पर बैठा है शेव  तो कोई इस क्रम में पांचवें  स्थान पर है।

बेर और जामुन ,किसी से कम नहीं है और न ही कम है फालसा (बैरी ).,और रसभरी।   

कंद से बुद्धि शुद्ध होती है विचार शुद्ध होता हैआलू ,अरबी ,कंद ,जिमीकंद ,चुकंदर ,शलगम ,मूली ,गाजर आदि यहीं  हैं।  

भजन जिससे बिगड़ता है वो आहार आपकी थाली में ही हो ये ज़रूरी नहीं है। 

मध्य प्रदेश में  सर्वाधिक  शाकाहारी लोग  रहते हैं। जब कोई साधु  भोजन पर बात करता है। प्याज लहसुन पर ध्यान चला जाता है। इस समय मनुष्य ज़हरीला बहुत सारा केमिकल खा रहा है ,जीवनाशी ,कीटनाशी ,आदि छिड़कना लाज़मी सा हो गया है कथित उत्तम खेती में।  अगर इस ज़हर से बचना है तो प्याज लहसुन एक औषधि है। भोजन की थाली से स्वास्थ्य बनता बिगड़ता  है।भले भोजन की थाली का भोजन सात्विक ही होना चाहिए। भजन को बनाने बिगाड़ने वाली और भी बातें हैं। 



एक आहार वो है जिसको हमारा शरीर दिन रात करता है। जो हमारी इन्द्रियाँ करतीं हैं। हमारा रोम-रोम  स्पर्श करता है,स्पर्श का सुख भोगता है वाज़िब , गैर वाज़िब  ,आँख अश्लील दृश्य का ,कान उत्तेजक  संगीत का आहार कर रहा है. जिभ्या के द्वारा वाणी का आहार हो रहा है स्वाद का आहार हो रहा है भजन इनसे, बिगड़ता है भोजन से नहीं। इन्हें सात्विक बनाइये। 

वी हेव ए क्रिमिनल आई 

उत्तेजक -परफ्यूम नाक सूंघती विवाह में ,नाइट पार्टियों में। मन बौराता है फिर घर आकर अनाप शनाप करता है।   

शयन कक्ष ,सोने वाले कमरे से (बैड रूम ) से टेलीविजन हटा दीजिये ,वरना लाख कोशिश कर लीजिये भजन नहीं होगा। कुछ दिन प्रयोग करके देख लीजिये। अर्द्ध नग्न चित्र मन में बसेरा कर लेते हैं। 

भगवान् ने प्रकट होकर दर्शन दिया है। मनु महाराज कहते हैं मुझे आप के  जैसा ही पुत्र चाहिए। 
 भगवान् ने कहा मेरे जैसा तो मैं ही हूँ। मैं ही तुम्हारे घर में पुत्र रूप जन्म लूंगा। आपके लिए अब  जैसा मैं हूँ वैसा दूसरा कहाँ से ढूंढ कर लाऊँ ?

आप सरिस खोजहुँ कहाँ जाहिं 

कुछ समय के बाद आप बहुत आसानी से शरीर छोड़ेंगे ,मेरे लोक में आकर निवास करेंगे - जल्दी ही आएंगे।  त्रेता में आप अवध नरेश होंगे मैं ही आपके यहां पुत्र बनकर जन्म  लूंगा।अंश के सहित मैं आपके यहां  अवतार लूंगा। धैर्य रखिये आप  जल्दी आएंगे गोलोक । 

जब भी सत्य लोभ के पीछे दौड़ेगा तो कोई न कोई 'कपट -मुनि' मिलेगा जो आपको राक्षस बनाके छोड़ेगा। 

आगे की कथा -इसी संदर्भ में है 

प्रतापभानु को ब्राह्मणों का शाप हो गया। सत्यकेतु का बेटा लोभ लालच के पीछे दौड़ा है राक्षस हो गया। यही प्रतापभानु आगे चलकर रावण बना। रावण ने जन सभा बुलाई है सभी नागरिकों अपने एक लाख पुत्रों सवा लाख नातियों के साथ बैठा है। 

रावण ने आदेश दिया -मेघनाद जाओ 

जेहि बिधि होये धर्म होये  निर्मूला -

जैसे भी हो जिस विधि भी धर्म को नष्ट हो करो।वेदों को समाप्त कर दो ,गौशालों में आग लगाओ ब्राह्मणों की बस्तियां उजाड़ो।   मूर्तियों को खंडित कर दो ,स्त्रियों   के गर्भ गिराओ।त्राहि त्राहि मच गई चारों दिशाओं में। तीनों लोक थरथरा के कांपने लगे।  

शंकर जी पार्वती को भगवान् राम के जो पूर्ण ब्रह्म हैं अवतार लेने के कारणों पर प्रकाश डाल रहे हैं :



बाढ़ै खल बहु ,चोर, जुआरा ,

जे लम्पट परधन परदारा ,

माँ नहीं मातु ,पिता नहीं देवा 

साधुन संग करवा -वहिं सेवा ,

जिनके ये आचरण भवानी ,

तेह जानहुँ निसिचर सब  प्राणी। 

धरती को शास्त्र में धैर्य कहा है। धरती ये पापाचार देखकर घबरा जाती है। पाप का भार भूमि सह नहीं पा रही है ,ऋषियों के पास सहायता मांगने जाती है गाय बनकर । ऋषि बोले देवी तुम अपना रोना रो रही हो हम खुद ही डरे -डरे रहते हैं न जाने कब मेघनाद आ जाए। जब सत्य मौन हो जाए मनन करने की क्षमता समाप्त हो जाए भगवान अवतार लेने के लिए तैयार हो जाते हैं। पुण्य और पुण्यात्माओं को बचाने के लिए पाप कर्म के विनाश के लिए। 

देव लोक में देवता घबराये हुए हैं -हम तो बाहर ही नहीं निकलते। देवता सद्कर्मों के प्रतीक हैं जब ये सद्कर्म समाज के कहीं दिखाई न दें दुष्कर्म ही दिखाई दें भगवान् कदम आगे बढ़ा देते हैं अवतार लेने के लिए । 

भगवान् से प्राथना करो  शंकर जी ने देवताओं से ,गाय से  कहा: 

देवता पूछने लगे शंकर जी से -

भगवान् कहाँ  मिलेंगे ,शंकर जी कहते हैं :

हरी व्यापक सर्वत्र समाना ,

प्रेम ते प्रकट होईं  मैं जाना। 

भगवान् कभी खोजे  नहीं जाते खोजने से मिला भी नहीं करते। 

भगवान् पुकारे जाते हैं जैसे चोर कभी पुलिस को नहीं खोजता लेकिन चोर कहीं भी छिपकर बैठ जाये पुलिस उसे ढूंढ ही लेती है वैसे ही भगवान् रुंधे हुए कंठ से पुकारे जाते हैं कंपकंपाते होंठों से याद किये जाते हैं भक्त कहीं भी   हों   फिर  वह खुद ही ढूंढ लेते हैं। 

(ज़ारी ...) 

(१ )https://www.youtube.com/watch?v=Wpd38pP_nP4

(२ )https://www.youtube.com/watch?v=oZf57KKvxao

(३ )



Vijay Kaushal Ji Maharaj | Shree Ram Katha Ujjain Day 9 Part 2 2016 mangalmaypariwar.com

बुधवार, 15 नवंबर 2017

NOV 14 Risk factors ;complications : Rheumatic Arthritis (Hindi lV)

Risk factors ;complications : Rheumatic Arthritis (Hindi)


उल्लेखित बातें इस रोग के खतरे के वजन या जोखिम को बढ़ा सकती हैं :

(१)लैंगिक वैभिन्न्य :औरतों के लिए इस रोग का जोखिम अपेक्षाकृत मर्दों से ज्यादा रहता है 

(२ )यूं वयक्ति कभी भी इस लोग से असरग्रस्त हो सकता है लेकिन आम तौर पर इसका जोखिम ४० से ६० साला आयुवर्ग के लिए बना रहता है ,साठ से ऊपर तो फिर खुला खेल फरुख्खाबादी है अन्य रोगों के लिए भी 

(३ )परिवारों में चलने वाला रोग है यह परिवारों में इसका पूर्ववृतान्त होने से अन्य सदस्यों के लिए इसका जोखिम बढ़ जाता है 

(४ )सिगरेट पीने की लत खासतौर से तब इसके खतरे को बढ़ा देती है जब आपकी जीनोम संरचना कुछ ख़ास जीन समूहों से युक्त रही आई हो यानी आपकी आनुवंशिक बुनावट भी रोग की संभावनाओं की एक वजह बनती हो ,जीवन इकाइयों का एक समूह जो इसके लिए उत्तरदाई माना जाता हो ,आप लिए हुए हों। 
(५ )माहौल और आपके वर्क प्लेस की पर्यावरणी परिश्थितियां आपका उद्योग धंधा भी इसके खतरे को बढ़ाने वाला कुछ मामलों में यथा एस्बेस्टोस उद्योग और  सिलिका धूल   से घिरे रहने वाला काम  . 

विश्वउद्योग केंद्र पर हुए हमले के फ़ौरन बाद  जिन कर्मचारियों ने पीड़ित लोगों को धूल और धुऐं से निकाला था उनके इस रोग से ग्रस्त होने का जोखिम बढ़ा हुआ बतलाया गया है भोपाल गैस एवं ऐसी ही अनेक त्रासदियां सहज अनुमेय है ऐसा ही करती होंगी। 
(६)मोटापा भी इसके खतरे के वजन को बढ़ाने वाला समझा गया है खासकर ५५ साला या इससे ऊपर आयुवर्ग की उन महिलाओं में जिनमें इसके रोग के  होने की पुष्टि हुई है। 

रोग का पेचीलापन 

(१ )रुमेटिक आर्थराइटिस से असरग्रस्त लोगों में यह रोग और इसमें  काम में ली जाने वाली कुछ दवाएं ऑस्टियोपोरोसिस (अस्थियों का एक रोग जिसमें अस्थिक्षय और हड्डियों के कमज़ोर होते जाने से कालान्तर में अस्थियां भुरभुरी ब्रिटिल होने लगती हैं आसानी से उठते बैठते भी टूटने लगतीं हैं )का जोखिम पैदा कर देती हैं।
(२ )रूमेटोइड गोलाकार गांठें खुरदरी (rheumatoid nodules )-जहां जहां प्रेशर पॉइंट्स हैं यथा कुहनियां वहां ये टिशू बम्प्स  जो ऊतकों के ही गुमड़ा या उभार होते हैं प्रकट हो सकते हैं।
(३ )आँखों और हलक (मुख )का सूखना ,आँखों से कुदरती तरल का कम होना  (Dry eyes and mouth ):People who have rheumatoid arthritis are much more likely to experience Sjogren's syndrome, a disorder that decreases the amount of moisture in your eyes and mouth.

स्जोग्रेंस सिंड्रोम एक ऑटोइम्यून डिसॉर्डर है जिसमें हमारा रोग रोधी तंत्र लार और आंसू बनाने वाली कोशिकाओं पर ही हमला करने लगता है इसे कभी कभार ड्राई -आई और ड्राई माउथ सिंड्रोम या शुष्क आँख -मुख- संलक्षण भी कह दिया जाता है।चालीस साल से ऊपर की महिलाओं के लिए इस संलक्षण का जोखिम बन जाता है। 

इस संलक्षण में मुख -आँख के अलावा श्वसनमार्गक्षेत्र इंफेक्शन या संक्रमण से असरग्रस्त होता है। अलावा इसके अन्य ग्रंथियां ,शरीर के अन्य ऊतक इन्फ्लेम होकर दुखन सूजन जलन का शिकार भी हो सकते हैं। 

Sjogren’s syndrome, otherwise known as dry eye or dry mouth syndrome, is an autoimmune condition in which the immune system mistakenly attacks the cells responsible for producing tears and saliva. Women over the age of forty are most at risk. Symptoms may include infections of the mouth, eyes, and breathing passages, as well as inflammation of the glands and other tissues in the body. Here are several indications Sjogren’s syndrome might be more than just dry eyes and mouth.

(४ )यहां इस रोग से ग्रस्त होने पर स्वयं रोग और साथ -साथ उसमें प्रयुक्त कुछ दवाएं भी हमारे रोगों से जूझने वाले कुदरती तंत्र को कमज़ोर करने लगतीं हैं इसका नतीजा यह होता है शरीर संक्रमणों के प्रति अरक्षित डिफेन्स लेस हो जाता है कोई सीमा सुरक्षा प्रहरी नहीं है यहां।

(५ )आपके शरीर का विशेष और असामान्य रचाव -एब्नार्मल बॉडी कम्पोज़िशन मायने रखती है :कुल अनुपात आपके शरीर में चर्बी (फैट )और लीनमॉस(मसल मॉस )कितना है  इसे वैसे भी आजकल सेहत का ज्यादा भरोसेमंद  माप या संकेत माना जाता है। जिन लोगों में यह अनुपात ऊंचा रहता है उनके लिए रोग का जोखिम ज्यादा रहता है। 

यह असामान्य रचाव कद -काठी का उन लोगों में भी देखा जाता है जिनका बॉडीमॉसइंडेक्स (BMI )आयु और लिंग के अनुरूप सामान्य माना जाता है। इसलिए अब ज्यादातर फिज़िकल जांच में फिटनेस का बेहतर पैमाना फ़ैट और लीन मॉस अनुपात को ही माना जाता है। प्रतिरक्षा सेवाओं में इसे ही तरजीह दी जा रही है वार्षिक स्वास्थ्य जांच में।

(६ )Carpal tunnel syndrome :यदि रुमेटिक आर्थराइटिस से ग्रस्त व्यक्ति की कलाइयां असरग्रस्त हुईं तब कलाइयों का इन्फ्लेमेशन (सूजन ,जलन ,संक्रमण )उस नस पर दाब बढ़ा सकता है जो हाथों और उंगलियों के संचालन में विधाई भूमिका निभाती है। नतीजा होता है उल्लेखित सिंड्रोम के लक्षणों का प्राकट्य। 
Carpal tunnel syndrome is a painful condition affecting the hands and arms where sensations like numbness and tingling are experienced among other symptoms. The condition is triggered by excess pressure on the median nerve in the wrist and can be caused by the anatomy of the wrist, patterns of hand use and certain underlying health problems.   

(७)रुमेटिक आर्थराइटिस और दिल से जुड़ी समस्याएँ :

इस रोग में धमनियों के लोच खोकर कठोर पड़ने और धमनी अवरोध, ब्लॉकेड आफ आर्टरीज़  के खतरे बढ़ जाते हैं। उस  सैक या थैली में भी इन्फ्लेमेशन हो सकता है जिसमें हृद पेशी रहती है। 

(७ )फेफड़ों के ऊतकों के इन्फ्लेम होने के साथ -साथ स्कारिंग का भी यानी ,विक्षत होने का ख़तरा भी  बना रहता है।नतीज़तन कालान्तर में शोर्टनेस आफ ब्रेथ का ख़तरा लगातार बढ़ता जाता  है.सांस ठीक से लेने में दिक्कत ,सांस लेना दूभर और विक्षोभकारी लगना शोर्टनेस आफ ब्रेथ ही है। 

(८ )रक्त कैंसर का एक पूरा समूह ही होता है जिसे कुलमिलाकर ग्रुप आफ ब्लड कैंसरस कह दिया जाता है -लसीका -तंत्र से सम्बन्ध रखता है यह कैंसर समूह। मानव शरीर में स्वेतरक्त कोशिकाओं वाला एक रंगहीन द्रव (तरल ) होता है जो इंफेक्शन (संक्रमण )को फैलने से रोकने की भूमिका में रहता है। इसे ही लसिका या लिम्फ (lymph )कहा जाता है -लसिका सम्बन्धी तंत्र ही लिम्फेटिक सिस्टम कहलाता है।

Lymph is a colorless liquid containing white blood cells that cleans the inside of our body and helps to prevent infections from spreading . 

Shortness of breath, also known as dyspnea, is a feeling like one cannot breathe well enough.   

  सन्दर्भ -सामिग्री :

(१ )http://healthprep.com/conditions/sjogrens-syndrome-5-indications-it-could-be-more-serious/?utm_source=bing-search&utm_medium=referral&utm_term=sjo

(२ ) 
Factors that may increase your risk of rheumatoid arthritis include:
  • Your sex. Women are more likely than men to develop rheumatoid arthritis.
  • Age. Rheumatoid arthritis can occur at any age, but it most commonly begins between the ages of 40 and 60.
  • Family history. If a member of your family has rheumatoid arthritis, you may have an increased risk of the disease.
  • Smoking. Cigarette smoking increases your risk of developing rheumatoid arthritis, particularly if you have a genetic predisposition for developing the disease. Smoking also appears to be associated with greater disease severity.
  • Environmental exposures. Although uncertain and poorly understood, some exposures such as asbestos or silica may increase the risk for developing rheumatoid arthritis. Emergency workers exposed to dust from the collapse of the World Trade Center are at higher risk of autoimmune diseases such as rheumatoid arthritis.
  • Obesity. People who are overweight or obese appear to be at somewhat higher risk of developing rheumatoid arthritis, especially in women diagnosed with the disease when they were 55 or younger.

Complications

Rheumatoid arthritis increases your risk of developing:
  • Osteoporosis. Rheumatoid arthritis itself, along with some medications used for treating rheumatoid arthritis, can increase your risk of osteoporosis — a condition that weakens your bones and makes them more prone to fracture.
  • Rheumatoid nodules. These firm bumps of tissue most commonly form around pressure points, such as the elbows. However, these nodules can form anywhere in the body, including the lungs.
  • Dry eyes and mouth. People who have rheumatoid arthritis are much more likely to experience Sjogren's syndrome, a disorder that decreases the amount of moisture in your eyes and mouth.
  • Infections. The disease itself and many of the medications used to combat rheumatoid arthritis can impair the immune system, leading to increased infections.
  • Abnormal body composition. The proportion of fat compared to lean mass is often higher in people who have rheumatoid arthritis, even in people who have a normal body mass index (BMI).
  • Carpal tunnel syndrome. If rheumatoid arthritis affects your wrists, the inflammation can compress the nerve that serves most of your hand and fingers.
  • Heart problems. Rheumatoid arthritis can increase your risk of hardened and blocked arteries, as well as inflammation of the sac that encloses your heart.
  • Lung disease. People with rheumatoid arthritis have an increased risk of inflammation and scarring of the lung tissues, which can lead to progressive 
  • shortness of breath.
  • Lymphoma. Rheumatoid arthritis increases the risk of lymphoma, a group of blood cancers that develop in the lymph system.
सन्दर्भ -सामिग्री :

(१ )http://rawarrior.com/what-causes-rheumatoid-arthritis-to-trigger/

(२ )https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/rheumatoid-arthritis/symptoms-causes/syc-20353648

(३ )https://www.webmd.com/rheumatoid-arthritis/ss/slideshow-ra-overview(Please see this links ,it shows RA in pictures).